अभिजित मुहूर्त: दिन का सबसे शक्तिशाली विजय काल, और बुधवार को यह वर्जित क्यों है?
भगवान श्रीराम का जन्म-मुहूर्त, जो समस्त दोषों को भस्म करता है; किंतु बुधवार को कंटक योग का शास्त्रीय निषेध।
आज का अभिजित मुहूर्त (विजय काल)
स्थान: नई दिल्ली (New Delhi) • दिनांक: 2026-11-06
शुद्ध स्थानीय गणना
स्थानीय मध्याह्न के दोनों ओर दिनमान के १५ भागों में से ८वाँ भाग।
शास्त्रीय समाधान एवं प्रमाण
अभिजित मुहूर्त दिन का आठवाँ मुहूर्त होता है (दिनमान के १५ समान भागों में से ठीक मध्य का भाग)। यह स्थानीय मध्याह्न (Local Solar Noon) के दोनों ओर समान रूप से विस्तृत होता है (लगभग २४ मिनट पूर्व और २४ मिनट पश्चात्)। शास्त्रों में कहा गया है कि अभिजित मुहूर्त में किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता; यह लाखों दोषों को नष्ट कर देता है। भगवान श्रीराम का अवतरण भी इसी मुहूर्त में हुआ था। किंतु बुधवार के दिन यह सर्वथा वर्जित है क्योंकि बुधवार को अभिजित मुहूर्त 'कंटक योग' का रूप धारण कर लेता है, जिससे कार्यों में विघ्न उत्पन्न होते हैं।
"निशीथवद् दिने ज्ञेयः सर्वदोषहरो महान्। अभिजित्संज्ञको योगः सौम्ये वारे विवर्जितः॥"
niśīthavad dine jñeyaḥ sarvadoṣaharo mahān | abhijitsaṃjñako yogaḥ saumye vāre vivarjitaḥ ||
भावार्थ: दिन के मध्य में संपूर्ण दोषों को हरने वाला महान अभिजित मुहूर्त होता है, किंतु यह सौम्य वार (बुधवार) को त्याज्य है।
खगोलीय एवं वैज्ञानिक आधार
स्थानीय सौर मध्याह्न (Local Solar Noon) वह क्षण है जब सूर्य याम्योत्तर (Meridian) को पार करता है। अभिजित की अवधि = दिनमान / १५। यदि दिनमान १२ घंटे का है, तो अभिजित ठीक ४८ मिनट का होगा। यदि ग्रीष्मकाल में दिनमान १३ घंटे का है, तो अभिजित ५२ मिनट का होगा। वन मंदिर स्थानीय अक्षांश-देशांतर से सटीक मध्याह्न निकालकर अभिजित निर्धारित करता है।
प्रचलित भ्रम व शास्त्रीय सत्य
भ्रम: 'अभिजित मुहूर्त हमेशा ११:४८ से १२:३६ तक ही होता है।' सत्य: यह केवल तब सही है जब स्थानीय मध्याह्न ठीक १२:०० बजे हो। भारत में पश्चिम (गुजरात) और पूर्व (असम) के मध्याह्न में लगभग १.५ घंटे का अंतर होता है। अतः दिल्ली और गुवाहाटी में अभिजित का समय अलग होता है।
मान्यता प्राप्त संदर्भ ग्रंथ (Authoritative Sourcing):
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या दक्षिण दिशा की यात्रा में अभिजित मुहूर्त शुभ माना जाता है?
शास्त्रीय मतानुसार अभिजित मुहूर्त में दक्षिण दिशा की यात्रा विशेषतः वर्जित मानी गई है, क्योंकि अभिजित में दक्षिण दिशा का शूल माना जाता है। अन्य दिशाओं हेतु यह परम शुभ है।
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