घर घर लक्ष्मी, शुद्ध नित्य मंदिर

    इस दीपावली, रोशनी के साथ
    सही समझ भी

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    दीपावली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त २०२६ — New Delhi

    New Delhi में दीपावली २०२६ लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 05:55 PM – 07:50 PM (रविवार, ८ नवंबर २०२६) है। यह प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) व स्थिर वृषभ लग्न का दुर्लभ शास्त्रोक्त संयोग है, जो घर व व्यापार में स्थायी समृद्धि का कारक माना जाता है।

    दिनांक८ नवंबर २०२६ (रविवार)
    सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त05:55 PM – 07:50 PM
    प्रदोष काल05:33 PM – 07:57 PM
    स्थिर वृषभ लग्न05:55 PM – 07:50 PM
    स्रोत ग्रन्थ: मुहूर्त चिन्तामणि / स्कन्द पुराण / द्रिक गणित सिद्धान्तसत्यापित: गीता प्रेस / प्रामाणिक वैदिक परम्परा
    दीपावली २०२६ • लक्ष्मी पूजन श्रेष्ठ मुहूर्त

    New Delhi में पूजा का समय

    दिनांक: रविवार, ८ नवंबर २०२६ • सूर्यास्त: 05:33 PM

    प्रदोष + स्थिर वृषभ लग्न05:55 PM – 07:50 PM(अवधि: १ घंटा ५५ मिनट)
    प्रदोष काल
    05:33 PM – 07:57 PM

    सूर्यास्त के तुरंत बाद २ घंटे २४ मिनट का समय। गृहस्थों के लिए अत्यंत फलदायी।

    स्थिर वृषभ लग्न
    05:55 PM – 07:50 PM

    स्थिर लग्न में पूजन से घर में माँ लक्ष्मी की कृपा व समृद्धि स्थायी रूप से वास करती है।

    महानिशीथ काल
    11:40 PM – 12:32 AM

    मध्यरात्रि काल — गहन ध्यान, श्री सूक्त पाठ, तंत्र-साधना व माँ काली पूजन हेतु श्रेष्ठ।

    सायंकालीन चौघड़िया मुहूर्त (New Delhi)

    शुभशुभ
    05:33 PM – 07:11 PM
    अमृतशुभ
    07:11 PM – 08:49 PM
    चरशुभ
    08:49 PM – 10:28 PM
    रोगअशुभ
    10:28 PM – 12:06 AM
    Calculated for New Delhi, India (28.6139°N, 77.2090°E, Asia/Kolkata)OneMandir-Jyotish-v2.6.4
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    इस शहर का सूर्यास्त समय: 05:33 PM

    दीपावली • श्री महालक्ष्मी पूजन८ नवंबर २०२६
    कार्ड पर अंकित मुहूर्त:
    05:55 PM – 07:50 PM

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    दीपावली: रोशनी के साथ सही समझ भी

    कार्तिक अमावस्या • ८ नवंबर २०२६

    अयोध्या में प्रभु श्री राम के आगमन पर दीपों की अवली और समुद्र मंथन से माँ महालक्ष्मी के प्राकट्य का यह पावन दिन है। सच्ची लक्ष्मी वह है जो धर्मपूर्वक अर्जित हो और कल्याण में व्यय हो। प्रदोष काल और स्थिर लग्न में मन को शांत रखकर गणेश-लक्ष्मी का पूजन करें।

    New Delhi में शुभ मुहूर्त: 05:55 PM – 07:50 PM
    सरल व प्रामाणिक विधि

    लक्ष्मी पूजन: शांत व श्रद्धामय विधान

    बिना किसी दिखावे या भ्रम के, घर के सभी सदस्य मिलकर शांति से पूजन संपन्न करें।

    1

    १. शुद्धि व संकल्प

    स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल व पुष्प लेकर दीप जलाएं और शांति, सद्भाव व निर्मल बुद्धि के लिए संकल्प लें।

    2

    २. गणेश जी की प्रथम पूजा

    सर्वप्रथम विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को कुमकुम, अक्षत, दूर्वा और मोदक/लड्डू अर्पित करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करें।

    3

    ३. कलश स्थापना व आह्वान

    चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी, कुबेर जी और श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। ताम्र या पीतल के कलश में जल, सुपारी, सिक्का और आम के पल्लव रखें।

    4

    ४. षोडशोपचार अर्पण

    माँ लक्ष्मी को पाद्य (चरण धोना), अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, कलावा, गंध, कुमकुम, अक्षत, कमल पुष्प और सुगन्धित धूप अर्पित करें।

    5

    ५. नैवेद्य व दीपदान

    खीर, बताशे, फल व मिष्ठान्न का भोग लगाएं। घर के मुख्य द्वार, तुलसी जी और सभी कमरों में गाय के घी अथवा तिल के तेल के दीपक प्रज्वलित करें।

    6

    ६. आरती व क्षमा प्रार्थना

    माँ लक्ष्मी व गणेश जी की आरती गाएं। अंत में हाथ जोड़कर प्रार्थना करें: 'हे माँ, पूजन में हुई किसी भी त्रुटि को क्षमा कर हमारे हृदय और घर में स्थायी वास करें।'

    वैदिक मंत्र व अर्थ

    दीपावली महालक्ष्मी मंत्र

    ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
    भावार्थ: हे कमलनयनी, कमल के आसन पर विराजमान भगवती महालक्ष्मी! मुझ पर प्रसन्न हों, मेरी विपदाओं व अज्ञान को दूर कर मेरे जीवन में शाश्वत शांति और मंगल का संचार करें।
    श्री कुबेर अष्टलक्ष्मी मन्त्र

    ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

    अर्थ: हे यक्षराज कुबेर, आप समस्त धन-धान्य के स्वामी हैं। हमारे घर में धर्मसम्मत समृद्धि व बरकत प्रदान करें।

    श्री गणेश विघ्नहर्ता मन्त्र

    वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

    अर्थ: करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी महाकाय गणेश जी, हमारे समस्त शुभ कार्यों को सदा विघ्न-रहित करें।

    सम्पूर्ण श्री महालक्ष्मी आरती (Om Jai Lakshmi Mata)

    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।\nतुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय...॥

    उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।\nसूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय...॥

    दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता।\nजो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय...॥

    तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।\nकर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय...॥

    जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।\nसब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता॥ ॐ जय...॥

    तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।\nखान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय...॥

    शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।\nरत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहिं पाता॥ ॐ जय...॥

    महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।\nउर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

    ऋग्वैदिक श्री सूक्तम् (मुख्य ऋचा)

    ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।\nचन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

    भावार्थ: हे अग्निदेव! सुवर्ण के समान कांतिमान, हरिण रूपी चंचलता को वश में करने वाली, स्वर्ण-रजत मालाओं से सुशोभित, चन्द्रमा के समान शीतल महालक्ष्मी को मेरे कल्याणार्थ आह्वान कीजिए।

    पूजन तैयारी चेकलिस्ट

    रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत (अखंड चावल)
    कमल का पुष्प, गेंदे के ताजे फूल व आम के पत्ते
    गाय का शुद्ध घी / तिल का तेल व मिट्टी के दीपक
    कलश, कलावा (मौली), नारियल व सुपारी
    खीर, बताशे, पंचामृत व ऋतुफल
    लाल अथवा पीला रेशमी चौकी वस्त्र

    शहर-वार समय में अंतर क्यों होता है?

    वैदिक पंचांग सूर्योदय और सूर्यास्त के सटीक खगोलीय क्षण पर निर्भर करता है। भारत के पूर्वी शहरों (जैसे कोलकाता, पटना) में सूर्य पश्चिमी शहरों (जैसे मुंबई, अहमदाबाद) की तुलना में ४० से ५० मिनट पहले अस्त होता है। इसलिए पूरे देश में एक ही समय पर पूजन करना शास्त्रसम्मत नहीं है। One Mandir आपके शहर के अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) के आधार पर वास्तविक सूर्यास्त निकाल कर प्रदोष काल की गणना करता है।

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