बसंत पंचमी
विद्या एवं वसंत ऋतु का स्वागत
कथा
सृष्टि-रचना के बाद ब्रह्मा जी ने देखा कि जगत में मौन एवं नीरसता है — तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का और माँ सरस्वती प्रकट हुईं। उनकी वीणा-झंकार से प्राणियों को वाणी, संगीत एवं विद्या मिली। माघ शुक्ल पंचमी उन्हीं का प्राकट्य दिवस है।
मंत्र
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
ज्ञान की देवी सरस्वती को बीज-मंत्र 'ऐं' से नमन।
व्रत विधि
पीले वस्त्र धारण करें, माँ सरस्वती की पूजा करें, पुस्तक/वाद्य-यंत्र अर्पित करें। बच्चों का अक्षर-आरंभ (विद्यारंभ) इसी दिन शुभ माना जाता है।
भोग
केसरिया खीर, बूंदी, पीले लड्डू