भाई दूज

    भाई दूज क्या है?

    बहन का तिलक, भाई की आयु

    कथा

    सूर्यदेव और संज्ञा की दो संतानें थीं — यमराज और यमुना। यमुना अपने भाई से बहुत स्नेह करती थीं और बार-बार निवेदन करतीं कि वे उनके घर भोजन करने आएँ। मृत्यु के देवता होने के कारण यमराज सदा व्यस्त रहते और टालते रहे।

    अंतत: कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन वे बहन के द्वार पहुँचे। यमुना ने हर्ष से भरकर स्नान कराया, मस्तक पर तिलक किया, आरती उतारी और अपने हाथों से बना भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वर माँगने को कहा। यमुना ने अपने लिए कुछ न माँगा — केवल यह कि इस तिथि पर जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ का तिलक और भोजन ग्रहण करे, उसे अकाल-मृत्यु और यम-भय न सताए।

    यमराज ने 'तथास्तु' कहा। तभी से यह दिन 'यम-द्वितीया' अथवा भाई दूज कहलाता है।

    मंत्र

    ॐ यमाय नमः

    धर्मराज यम को नमन — दीर्घायु और निर्भयता की प्रार्थना।

    व्रत विधि

    भाई बहन के घर जाकर भोजन ग्रहण करे। बहन भाई को आसन पर बैठाकर मस्तक पर तिलक करे, अक्षत लगाए, आरती उतारे और मिष्ठान्न खिलाए; भाई बहन को उपहार दे। जिनकी सगी बहन न हो वे चचेरी-ममेरी बहन के यहाँ, अथवा यमुना-तट पर जाकर यह विधि पूर्ण करें।

    भोग

    मिष्ठान्न, बहन के हाथ का बना भोजन, नारियल