छठ पूजा
अस्त एवं उदित सूर्य का महा-पर्व
कथा
महाभारत-काल में कुंती ने सूर्य की उपासना से कर्ण को पाया; द्रौपदी ने सूर्य-व्रत से पांडवों का राज्य पुन: प्राप्त किया। बिहार-पूर्वांचल में चार दिन का यह कठोर व्रत — नहाय-खाय, खरना, संध्या-अर्घ्य, उषा-अर्घ्य — सूर्य एवं उनकी बहन छठी मैया को समर्पित है।
मंत्र
ॐ सूर्याय नमः · ॐ घृणि सूर्याय नमः
तेजोमय सूर्य देव को नमन।
व्रत विधि
36 घंटे निर्जल व्रत। तृतीय दिन संध्या-काल नदी/तालाब में अस्त-सूर्य को अर्घ्य; चतुर्थ दिन ब्रह्म-मुहूर्त में उदित सूर्य को अर्घ्य देकर पारण।
भोग
ठेकुआ, चावल के लड्डू, गन्ना, नारियल, मौसमी फल