गणेश चतुर्थी
विघ्न-हर्ता का दश-दिवसीय उत्सव
कथा
माँ पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक बनाया और स्नान-गृह की रक्षा हेतु नियुक्त किया। जब महादेव लौटे तो बालक ने उन्हें भीतर जाने से रोका — क्रोध में महादेव ने उसका सिर काट दिया। पार्वती के विलाप पर महादेव ने एक गज-शिशु का सिर लगाकर उसे पुनर्जीवित किया और 'गणेश' नाम देकर समस्त गणों का अधिपति बनाया।
मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
गणपति को बीज-मंत्र 'गं' से नमन।
व्रत विधि
स्थापना के दिन व्रत रखें — चंद्र-दर्शन वर्जित (मिथ्या-कलंक का योग)। प्रात: स्नान कर मूर्ति-स्थापना, 21 दूर्वा, मोदक का भोग। दशमी/अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन।
भोग
मोदक, लड्डू, दूर्वा, केला, नारियल