हनुमान जयंती

    रामभक्त का प्राकट्य दिवस

    कथा

    चैत्र पूर्णिमा को माता अंजना एवं पवन-देव के पुत्र रूप में हनुमान जी का जन्म हुआ। बाल्यकाल में सूर्य को फल समझकर निगलने चले — इंद्र ने वज्र-प्रहार किया, फिर देवताओं ने अनेक वरदान दिए। आगे चलकर वही बालक रामभक्ति का परम आदर्श बने।

    मंत्र

    ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्

    रुद्र-स्वरूप हनुमान को 'हं' बीज-मंत्र से नमन।

    व्रत विधि

    ब्रह्म-मुहूर्त में स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें; हनुमान चालीसा 11 बार व सुंदरकाण्ड पाठ। सिंदूर-चमेली का तेल अर्पण, बूंदी/लड्डू का भोग।

    भोग

    बूंदी, बेसन के लड्डू, गुड़-चना