हरियाली तीज
हरियाली तीज क्या है?
शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का हरा-भरा पर्व
कथा
माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए एक सौ आठ जन्मों तक तप किया। हिमालय-पुत्री के रूप में जन्म लेकर उन्होंने वन में जाकर कठोर साधना की — अन्न त्यागा, केवल वायु पर रहीं, और वर्षा-शीत-ताप सब सहे।
उनकी सखियाँ उन्हें वन में ले गईं जहाँ उन्होंने बालू का शिवलिंग बनाकर पूजन किया। श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन महादेव प्रसन्न हुए और उन्होंने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया।
यही पुनर्मिलन का दिन हरियाली तीज कहलाया। स्त्रियाँ इस दिन हरे वस्त्र धारण करती हैं, मेहंदी रचाती हैं और झूला झूलती हैं — श्रावण की हरियाली स्वयं इस मिलन का उत्सव मानी जाती है।
मंत्र
ॐ नमः शिवाय
शिव को नमस्कार — कल्याण-स्वरूप को प्रणाम।
व्रत विधि
निर्जला अथवा फलाहार व्रत। प्रातः स्नान कर हरे वस्त्र धारण करें; शिव-पार्वती का पूजन, झूला और मेहंदी। सायंकाल कथा श्रवण के पश्चात पारण।
भोग
घेवर, मालपुआ, खीर