हरतालिका तीज
हरतालिका तीज क्या है?
सखियों द्वारा हरण — और बालू के शिवलिंग का पूजन
कथा
नाम ही कथा कहता है: 'हरत' अर्थात् हरण, 'आलिका' अर्थात् सखी। पार्वती के पिता हिमालय ने उनका विवाह भगवान विष्णु से निश्चित कर दिया था, किंतु पार्वती मन ही मन महादेव को वर चुकी थीं।
यह जानकर उनकी सखियाँ उन्हें घने वन में ले गईं और छिपा दिया। वहाँ भाद्रपद शुक्ल तृतीया को पार्वती ने बालू का शिवलिंग बनाकर निर्जल रहकर रात्रि-जागरण सहित पूजन किया। महादेव प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान दिया कि वे ही उनके पति होंगे।
इसी स्मृति में स्त्रियाँ — कुंवारी और विवाहित दोनों — यह कठिन निर्जला व्रत रखती हैं।
मंत्र
ॐ हराय नमः
हर — जो हर लेते हैं, दुःख और पाप दोनों — उन शिव को नमस्कार।
व्रत विधि
कठिन निर्जला व्रत, रात्रि जागरण सहित। बालू अथवा मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर षोडशोपचार पूजन; प्रातः पारण।
भोग
फल, पंचामृत, नारियल