होली
रंगों का पर्व — प्रेम और एकता
कथा
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान था। उसने भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में प्रवेश किया — परंतु प्रभु-कृपा से होलिका भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गए। अगले दिन ब्रज में श्रीकृष्ण ने राधा एवं गोपियों संग रंग खेला — यही 'धुलंडी' है।
मंत्र
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा
गोपीजन के प्रिय गोविन्द कृष्ण को नमन।
व्रत विधि
पूर्णिमा की रात्रि होलिका दहन — परिक्रमा करते हुए जौ, चना, नारियल अर्पण। अगले दिन गुलाल-रंग, ठंडाई, गुजिया से उत्सव।
भोग
गुजिया, मालपुआ, ठंडाई, दहीबड़े