जन्माष्टमी
मध्य-रात्रि का दिव्य अवतरण
कथा
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की रात्रि, मथुरा के कारागार में देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। मूसलाधार वर्षा के बीच वसुदेव शिशु कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार कर गोकुल में नंद-यशोदा के घर पहुँचा आए — और कंस के अत्याचार का अंत निकट आया।
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
वासुदेव-पुत्र भगवान को नमन — द्वादशाक्षर मूल मंत्र।
व्रत विधि
दिन भर निर्जल/फलाहार व्रत। मध्य-रात्रि (12 बजे) कृष्ण-जन्म, पंचामृत अभिषेक, झूला झुलाना। दही-हांडी प्रसाद से व्रत खोलें।
भोग
माखन-मिश्री, पंचामृत, धनिया पंजीरी