कजरी तीज

    कजरी तीज क्या है?

    पति की दीर्घायु हेतु रखा जाने वाला व्रत

    कथा

    भाद्रपद कृष्ण तृतीया को कजरी तीज मनाई जाती है। इस दिन स्त्रियाँ नीम की डाल — नीमड़ी माता — का पूजन करती हैं और दिनभर निराहार रहकर सायंकाल चंद्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।

    परंपरा कहती है कि सत्तू, नीम और जल से किया गया यह पूजन कुटुंब की रक्षा करता है। चंद्रमा को अर्घ्य देकर, कथा सुनकर तब पारण किया जाता है।

    राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में इसे कजली अथवा बड़ी तीज भी कहते हैं — हरियाली तीज के ठीक पंद्रह दिन बाद।

    मंत्र

    ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः

    उमा और महेश्वर — पार्वती-शिव के युगल को नमस्कार।

    व्रत विधि

    दिनभर निराहार। नीमड़ी माता का पूजन; चंद्रोदय पर अर्घ्य देकर सत्तू से पारण।

    भोग

    सत्तू, गुड़-घी, नीम की पत्ती