करवा चौथ
सुहागिनों का चंद्र-व्रत
कथा
वीरावती नामक सुहागिन ने पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा। भूख से व्याकुल होते देख भाइयों ने पीपल पर दीपक रख नकली चंद्र-दर्शन करा दिया — व्रत खंडित हुआ, पति की मृत्यु हो गई। माँ पार्वती ने वीरावती को सच्चे व्रत की विधि बताई, उसने पुन: पूर्ण निष्ठा से व्रत किया और पति को पुनर्जीवन मिला।
मंत्र
ॐ शिवायै नमः · ॐ नमः शिवाय
गौरी-शंकर युगल को नमन — सौभाग्य की रक्षा हेतु।
व्रत विधि
सूर्योदय पूर्व 'सरगी' ग्रहण; दिन भर निर्जल व्रत। संध्या-काल करवा माता की कथा सुनें, चलनी से चंद्रमा एवं पति के दर्शन कर अर्घ्य दें — फिर पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें।
भोग
सरगी (फेनी, मठरी, मेवा), हलवा-पूरी