महाशिवरात्रि
शिव-पार्वती विवाह की महान रात्रि
कथा
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि — भगवान शिव का पार्वती संग दिव्य विवाह संपन्न हुआ। यही वह रात्रि भी है जब आदियोगी ने अपनी पहली शिक्षा सप्तर्षियों को दी थी। चार प्रहर की पूजा से जीव-शिव का मिलन साधा जाता है।
मंत्र
ॐ नमः शिवाय
भगवान शिव को पंचाक्षर नमन।
व्रत विधि
दिनभर निर्जल व्रत, रात्रि-जागरण। चार प्रहर शिवलिंग पर क्रमश: दूध, दही, घी एवं शहद से अभिषेक; बिल्वपत्र, धतूरा, भांग अर्पण। 'ॐ नमः शिवाय' का अखंड जाप।
भोग
ठंडाई, मखाने की खीर, फल