मकर संक्रांति

    उत्तरायण आरंभ — सूर्य का मकर-प्रवेश

    कथा

    इस दिन सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं — उत्तरायण-काल आरंभ होता है, जिसे देव-दिवस कहा गया है। भीष्म पितामह ने इसी पुण्य-काल की प्रतीक्षा कर शरीर त्यागा था। गंगा-स्नान, तिल-दान एवं पतंगबाजी की परंपरा है।

    मंत्र

    ॐ घृणि सूर्याय नमः

    तेजोमय सूर्य को नमन — आरोग्य एवं ऊर्जा का बीज-मंत्र।

    व्रत विधि

    प्रात: गंगा/पवित्र नदी स्नान, तिल-गुड़ का दान, खिचड़ी का सेवन, सूर्य को अर्घ्य।

    भोग

    तिल-गुड़ की चिक्की, खिचड़ी, गजक