शारदीय नवरात्रि

    नौ रूप, नौ रात्रि, एक शक्ति

    कथा

    महिषासुर नामक दैत्य ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की संयुक्त शक्ति से माँ दुर्गा प्रकट हुईं और नौ दिनों तक चले महायुद्ध के बाद दशमी तिथि को महिषासुर का वध किया। यही नौ रात्रियाँ 'नवरात्रि' कहलाईं और दसवीं तिथि 'विजयादशमी'। हर रात्रि माँ का एक नया रूप पूजा जाता है।

    मंत्र

    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

    देवी चामुण्डा को नमन — समस्त शक्तियों की बीज-वंदना।

    व्रत विधि

    नौ दिन निराहार/फलाहार व्रत। सुबह स्नान कर कलश-स्थापना, अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती पाठ। प्याज-लहसुन, मांस-मदिरा वर्जित। नवमी को कन्या-पूजन एवं हवन।

    भोग

    खीर, हलवा, पूड़ी, चना, नारियल, गुड़

    दिन-प्रतिदिन

    1. 1प्रथम दिनशैलपुत्री · गाय का घी
    2. 2द्वितीय दिनब्रह्मचारिणी · शक्कर / मिश्री
    3. 3तृतीय दिनचंद्रघंटा · दूध / खीर
    4. 4चतुर्थ दिनकूष्माण्डा · मालपुआ
    5. 5पंचम दिनस्कंदमाता · केला
    6. 6षष्ठम दिनकात्यायनी · शहद
    7. 7सप्तम दिनकालरात्रि · गुड़
    8. 8अष्टम दिनमहागौरी · नारियल
    9. 9नवम दिनसिद्धिदात्री · तिल / हलवा-पूड़ी