रक्षा बंधन
रक्षा-सूत्र का पावन पर्व
कथा
जब श्रीकृष्ण की उंगली कट गई, द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर बाँध दिया। श्रीकृष्ण ने उसी क्षण रक्षा का वचन दिया — और चीर-हरण के समय वही वचन निभाया। तब से बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है और भाई आजीवन रक्षा का प्रण लेता है।
मंत्र
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
जिस सूत्र से दानवेन्द्र महाबली राजा बलि बँधे, उसी से तुम्हें बाँधती हूँ — हे रक्षा-सूत्र, अचल रहो, अचल रहो।
व्रत विधि
श्रावण पूर्णिमा प्रात: बहन थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीप एवं मिठाई सजाए; भाई के दाहिने हाथ में राखी बाँधे, तिलक कर मुख मीठा कराए।
भोग
घेवर, मिठाई, खीर