शनि जयंती
न्यायाधीश शनि का प्राकट्य दिवस
कथा
ज्येष्ठ अमावस्या को सूर्य-पुत्र शनि देव का जन्म हुआ। उनकी माता छाया की तपस्या के प्रभाव से बाल्यकाल में ही शनि की दृष्टि अत्यंत प्रभावशाली हो गई। न्याय एवं कर्मफल के अधिपति शनि की कृपा से दुष्कर्म कटते हैं और सत्कर्मी को आशीर्वाद मिलता है।
मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनैश्चर देव को बीज-मंत्र 'शं' से नमन।
व्रत विधि
काले वस्त्र धारण करें, शनि मंदिर में तिल-तेल का दीप जलाएँ, नीले फूल अर्पित करें। 'शनि चालीसा' एवं हनुमान चालीसा का पाठ। काले उड़द, लोहा एवं तेल का दान।
भोग
उड़द दाल, तिल के लड्डू, काले चने